Yoga : अनुलोम विलोम प्राणायाम और उसके फायदे

अनुलोम विलोम (Anulom Vilom)

योग आज के युग मे बहुत ही अधिक जरुरी बन गया है। योग के माध्यम से इम्युनिटी सिस्टम (Immunity System)मजबूत बनता है। साथ ही सकारात्मक विचारो(Positive thoughts) का संचरण होने लगता है। योग के द्वारा मन शांत रहता है और एक अलग सी स्फूर्ति शरीर मे बनी रहती है। योग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने मे सहायता करता है।

अनुलोम विलोम का शाब्दिक अर्थ (Meaning of Anulom Vilom)

अनुलोम का शाब्दिक अर्थ है सीधा और विलोम का शाब्दिक अर्थ है उल्टा। अनुलोम विलोम प्राणायाम (Anulom Vilom Pranayam)करते समय नाक के दाहिने छिद्र से लम्बी साँस अंदर लेते है और बाई नाक के छिद्र से साँस को बाहर निकालते हैं। फिर इस क्रिया का उल्टा करते हैं यानि नाक के बाएं छिद्र से साँस अंदर और दाहिने छिद्र से बाहर निकालते हैं।

अनुलोम विलोम के लाभ (Benefits of Anulom Vilom)

1-अनुलोम विलोम प्राणायाम(Anulom Vilom) के नियमित अभ्यास से वात, कफ और पित्त तीनों दोषों को ठीक किया जा सकता है।
2-अनुलोम विलोम प्राणायाम (Anulom Vilom) के नियमित अभ्यास से रक्तचाप और मधुमेह (Blood Presure and sugar)को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।
3-अनुलोम विलोम प्राणायाम(Anulom Vilom) के नियमित अभ्यास से ‘वात दोष’ की गड़बड़ी के कारण होने वाली सभी बीमारियों को ठीक किया जा सकता है।
4-अनुलोम विलोम प्राणायाम(Anulom Vilom) मांसपेशियों के रोग, पेट फूलना और अम्लता में लाभकारी हैं।
5-यह प्राणायाम सोच को नकारात्मक (Negetive)दिशा से सकारात्मक दिशा की तरफ ले जाता है।
6-तनाव, क्रोध, चिंता, विस्मृति, बेचैनी, उच्च रक्तचाप, माइग्रेन और नींद की कमी को कोसो दूर करता है।
7-अनुलोम विलोम प्राणायाम (Anulom Vilom) के नियमित अभ्यास से एकाग्रता, धैर्य, संकल्पशीलता, निर्णय लेने की क्षमता और रचनात्मकता मे वृद्धि होती है।
8-यह प्राणायाम रक्त परिसंचरण (Blood circulation)को दुरुस्त करता है।
9-अनुलोम विलोम प्राणायाम (Anulom Vilom) तनाव और चिंताओं से छुटकारा दिलाने मे लाभकारी है।
10-यह प्राणायाम मोटापे को दूर करता है।
11-अनुलोम विलोम प्राणायाम (Anulom Vilom) कब्ज, गैस्ट्रिक, गैस्ट्रिक समस्याओं और खर्राटों का पूर्ण इलाज करता है।

अनुलोम विलोम कैसे करें (How to do Anulom Vilom)

1-अनुलोम विलोम प्राणायाम करना बहुत ही सरल है सर्वप्रथम आँखें बंद का पद्मासन(Padmasan) की मुद्रा मे बैठ जाए और अपने हाथों को अपने घुटनों पर रखें।
2-दाहिने नथुने को दाहिने अंगूठे से बंद करें।
3-बाएं नथुने के माध्यम से धीरे-धीरे श्वास लें ।
4-दाहिने अंगूठे को हटाते हुए मध्यमा उंगली की सहायता से बाएं नथुने को बंद करे और श्वास बाहर दाहिने नथुने से छोड़े ।
5-अब दाईं नथुने से अंदर को श्वास भरे ,श्वास लेने के बाद दाहिने अंगूठे से दाहिने नथुने बंद करे और बाएं नथुने से श्वास बाहर छोड़े ।
6-यह क्रिया 5 मिनट के लिए दोहराएं। आप इसे दिन के किसी भी समय कर सकते हैं।

यह भी देखें –

 https://educationmasters.in/kapaalbhati-pranayam-importance-benefits/

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