उत्तराखंड की प्रमुख नदियाँ | Main Rivers of Uttarakhand | UK river Gk in hindi
By Pooja | General knowledge | Apr 16, 2020

Uttarakhand Rivers gk in hindi, main uttarakhand river GK in hindi
उत्तराखंड प्राकृतिक धन सम्पदा से परिपूर्ण है। इसलिए उत्तराखड को देव भूमि(Devbhoomi) के नाम से भी जाना जाता है। हमारे उत्तराखंड मे पवित्र नदिया बहकर अन्य स्पर्श से उत्तराखंड (Uttarakhand)को स्वच्छ और निर्मल बनती है। उत्तराखंड की प्रमुख नदियाँ निम्न प्रकार हैं:

अलकनंदा नदी का उद्गम अलकापुरी स्थित सतोपंथ(Satopanth) शिखर के हिमनद और सतोपंथ ताल से है। प्रारम्भ से ही अलकनंदा को विष्णुगंगा(Vishnuganga) के नाम से भी सम्बोधित किया जाता रहा है। अलकनंदा की लम्बाई एक सौ पिचानब्बे किलोमीटर है। लक्ष्मणगंगा, भागीरथी, धौलीगंगा,नंदाकिनी, मन्दाकिनी, पिंडर, नबालिका अलकनंदा की सहायक नदियाँ हैं।

मन्दाकिनी नदी का उद्गम चौराबाड़ी ताल(Chaurabadi Tal) है। मन्दाकिनी नदी कालीगंगा के साथ सोनप्रयाग (Sonprayag)मे मिलती है और अलकनंदा नदी के साथ इसका संगम स्थल रुद्रप्रयाग(Rudraprayag) है। 2013 मे केदारनाथ मे आने वाली भयानक जलप्रलय मे मन्दाकिनी नदी का ही रौद्र रूप देखने को मिला था।

उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री (Gangotri)से भागीरथी नदी लगभग 19 किलोमीटर दूर शिवलिंग शिखर ने निचले भाग मे स्थित गोमुख (Gomukh)ग्लेशियर से उद्गमित होती है। मापन के अनुसार भागीरथी की लम्बाई दो सौ पांच किलोमीटर है। देवप्रयाग (Devprayag)मे भागीरथी का संगम अलकनंदा से होता है जिसके पश्चात भागीरथी को गंगा (Ganga)के नाम से जाना जाता है।

नन्दाघुंघटी से नंदाकिनी नदी निकलती है और अलकनंदा नदी से नंदप्रयाग (Nandprayag)में जाकर मिल जाती है।
काली या शारदा(Kali/ Sharda):

काली नदी का उद्गम स्थल पिथौरागढ़ जिले (Pithoragarh)में स्थित कालापानी है। काली नदी को शारदा नदी (Sharda River)के नाम से भी जाना जाता है। शारदा या काली नदी की सहायक नदियों मे गौरीगंगा, पूर्वी धौलीगंगा, लोहावती, सरयू नदी सम्मिलित हैं। काली नदी जौलजीबी (Jauljibi)में मिलम ग्लेशियर से निकलने वाली गौरीगंगा से मिल जाती है काली नदी को बरमदेव नामक जगह से शारदा(Sharda) के नाम से पुकारा जाता है।

कोसी नदी कौसानी(Kausani) और बिनसर की पहाड़ियों से निकलती है । कोसी की सहायक नदियों मे मिनोलगाड़, सुमालिगाड़, देवगाड़ हैं । कोसी नदी (Kosi)की लम्बाई 168 किलोमीटर है।

यमुना नदी का उद्गम उत्तरकाशी में बन्दरपूँछ पर्वत पर स्थित यमुनोत्री (Yamunotri)कांठा से है। यमुना(Yamuna) की सहायक नदियाँ टोंस, आसन, गिरी, कृष्णागाड़, कमलगाड़, ऋषिगंगा, हनुमानगंगा आदि हैं।

अलकनंदा और भागीरथी के देवप्रयाग(Devprayag) मे संगम के पश्चात भागीरथी गंगा के नाम से जानी जाती है। गंगा हिन्दू धर्म मे सबसे पवित्र नदी है सनातन धर्म मे गंगा को माँ की उपाधि दी गयी है। गंगा (Ganga)नदी की लम्बाई 2601 किलोमीटर है।

धौलीगंगा नंदा का उद्गम -त्रिशूली पर्वत(Trishuli ) श्रृंखला है। धौलीगंगा विष्णुप्रयाग(Vishnuprayag) में अलकनंदा नदी के साथ मिलती है।

पिण्डर नदी पिंडारी ग्लेशियर से निकलकर कर्णप्रयाग(Karnprayag) में अलकनंदा नदी के साथ मिलती है ।
उत्तराखंड प्राकृतिक धन सम्पदा से परिपूर्ण है। इसलिए उत्तराखड को देव भूमि(Devbhoomi) के नाम से भी जाना जाता है। हमारे उत्तराखंड मे पवित्र नदिया बहकर अन्य स्पर्श से उत्तराखंड (Uttarakhand)को स्वच्छ और निर्मल बनती है। उत्तराखंड की प्रमुख नदियाँ निम्न प्रकार हैं:
अलकनंदा (Alaknanda):

अलकनंदा नदी का उद्गम अलकापुरी स्थित सतोपंथ(Satopanth) शिखर के हिमनद और सतोपंथ ताल से है। प्रारम्भ से ही अलकनंदा को विष्णुगंगा(Vishnuganga) के नाम से भी सम्बोधित किया जाता रहा है। अलकनंदा की लम्बाई एक सौ पिचानब्बे किलोमीटर है। लक्ष्मणगंगा, भागीरथी, धौलीगंगा,नंदाकिनी, मन्दाकिनी, पिंडर, नबालिका अलकनंदा की सहायक नदियाँ हैं।
मन्दाकिनी (Mandakini):

मन्दाकिनी नदी का उद्गम चौराबाड़ी ताल(Chaurabadi Tal) है। मन्दाकिनी नदी कालीगंगा के साथ सोनप्रयाग (Sonprayag)मे मिलती है और अलकनंदा नदी के साथ इसका संगम स्थल रुद्रप्रयाग(Rudraprayag) है। 2013 मे केदारनाथ मे आने वाली भयानक जलप्रलय मे मन्दाकिनी नदी का ही रौद्र रूप देखने को मिला था।
भागीरथी(Bhagirathi):

उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री (Gangotri)से भागीरथी नदी लगभग 19 किलोमीटर दूर शिवलिंग शिखर ने निचले भाग मे स्थित गोमुख (Gomukh)ग्लेशियर से उद्गमित होती है। मापन के अनुसार भागीरथी की लम्बाई दो सौ पांच किलोमीटर है। देवप्रयाग (Devprayag)मे भागीरथी का संगम अलकनंदा से होता है जिसके पश्चात भागीरथी को गंगा (Ganga)के नाम से जाना जाता है।
नंदाकिनी(Nadakini):

नन्दाघुंघटी से नंदाकिनी नदी निकलती है और अलकनंदा नदी से नंदप्रयाग (Nandprayag)में जाकर मिल जाती है।
काली या शारदा(Kali/ Sharda):

काली नदी का उद्गम स्थल पिथौरागढ़ जिले (Pithoragarh)में स्थित कालापानी है। काली नदी को शारदा नदी (Sharda River)के नाम से भी जाना जाता है। शारदा या काली नदी की सहायक नदियों मे गौरीगंगा, पूर्वी धौलीगंगा, लोहावती, सरयू नदी सम्मिलित हैं। काली नदी जौलजीबी (Jauljibi)में मिलम ग्लेशियर से निकलने वाली गौरीगंगा से मिल जाती है काली नदी को बरमदेव नामक जगह से शारदा(Sharda) के नाम से पुकारा जाता है।
कोसी(Kosi):

कोसी नदी कौसानी(Kausani) और बिनसर की पहाड़ियों से निकलती है । कोसी की सहायक नदियों मे मिनोलगाड़, सुमालिगाड़, देवगाड़ हैं । कोसी नदी (Kosi)की लम्बाई 168 किलोमीटर है।
यमुना (Yamuna):

यमुना नदी का उद्गम उत्तरकाशी में बन्दरपूँछ पर्वत पर स्थित यमुनोत्री (Yamunotri)कांठा से है। यमुना(Yamuna) की सहायक नदियाँ टोंस, आसन, गिरी, कृष्णागाड़, कमलगाड़, ऋषिगंगा, हनुमानगंगा आदि हैं।
गंगा (Ganga):

अलकनंदा और भागीरथी के देवप्रयाग(Devprayag) मे संगम के पश्चात भागीरथी गंगा के नाम से जानी जाती है। गंगा हिन्दू धर्म मे सबसे पवित्र नदी है सनातन धर्म मे गंगा को माँ की उपाधि दी गयी है। गंगा (Ganga)नदी की लम्बाई 2601 किलोमीटर है।
धौलीगंगा (Dhauliganga):

धौलीगंगा नंदा का उद्गम -त्रिशूली पर्वत(Trishuli ) श्रृंखला है। धौलीगंगा विष्णुप्रयाग(Vishnuprayag) में अलकनंदा नदी के साथ मिलती है।
पिण्डर (Pindar):

पिण्डर नदी पिंडारी ग्लेशियर से निकलकर कर्णप्रयाग(Karnprayag) में अलकनंदा नदी के साथ मिलती है ।
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