Yoga :कपालभाति प्राणायाम (Kapalbhati Pranayama)

कपालभाति प्राणायाम (Kapalbharti Pranayam)
आज का आधुनिक युग भाग दौड़ और व्यवस्थाओं का युग(Era) है। इस युग मे दौड़ भाग के बीच मनुष्य अपने लिए वक्त नहीं निकल पाता और अपनी immunity system को लगातार खोता रहता है। परन्तु प्राणायाम और योगासनों (Pranayam or yoga)द्वारा हम अपने शरीर के immunity system को बढ़ा सकते हैं। इन्ही प्राणायामों मे आज हम आपको कपालभाति के विषय मे बताना चाहते है। कपालभाति प्राणायाम का शाब्दिक अर्थ है -कपाल=मस्तक (सिर); भाती= चमकने वाला; प्राणायाम = साँस लेने की प्रक्रिया। यह प्राणायाम आपके वजन को तो कम करता ही है साथ ही शरीर के संतुलन को भी बनाये रखता है।
कपालभाति प्राणायाम का महत्व | Importance of Kapalbhati Pranayama
कपालभाति प्राणायाम(Kapalbhati) को रोजाना करने से शरीर के अस्सी प्रतिशत विषैले तत्व शरीर से साँस के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं। यह प्राणायाम(Pranayam) बुद्धि को स्वच्छ व तीक्ष्ण बनाने के साथ ही नकारात्मक (Negetive thoughts)विचारो को भी शरीर से बाहर निकालता है। कपालभाति को हम "चमकने वाला मस्तक"भी कह सकते है।
कपालभाति प्राणायाम करने की विधि । How To Do Kapalbhati Pranayama
1- अपनी रीढ़ की हड्डी(Spine) को सीधा रखते हुए आराम की मुद्रा मे बैठ जाएँ।
2- अपने हाथों को आराम से आकाश की तरफ रखते हुए घुटनों(Knees) पर रखें।
3- एक गहरी लंबी साँस (Breath)अंदर की ओर लें।
4- फिर साँस को छोड़ते हुए अपने पेट (Stomach)को अंदर की तरफ खींचे। जितना हो सके उतना ही करें। नाभि (Bellybutton)को अंदर की ओर खींचे।
5- जैसे ही आप पेट की मासपेशियों को ढीला छोड़ते हो, साँस अपने आप ही आपके फेफड़ों (Lungs)में पहुँच जाती है।
6- कपालभाति प्राणायाम (Kapaalbhati pranayam)के एक क्रम को पूरा करने के लिए 20 साँस छोड़े।
7- एक राउंड (Round)खत्म होने के पश्चात थोड़ा विश्राम करें और अपनी आँखों को बंद कर लें। अपने शरीर में प्राणायाम से प्रकट हुई उत्तेजना को महसूस करें।
8- कपालभाति प्राणायाम के दो और क्रम (Round) को पूरा करें।
कपालभाति प्राणायाम करते समय नुस्खें (Tips while doing Kapalbhati Pranayama)
1- कपालभाति प्राणायाम(Kapaalbhati) को करते वक़्त ज़ोर से पूरी ताकत के साथ साँस को बाहर की तरफ छोड़ें।
2- जैसे ही अपने पेट की मासपेशियों(Muscles) को ढीला छोड़ते है सांस लेने की प्रक्रिया स्वतः ही होने लगती है।
3- आप बस अपना ध्यान बाहर जाती हुई साँस(Breath) पर केंद्रित करें ।
4- इसका अभ्यास खाली पेट (Empty stomach)होने पर ही करें।
कपालभाति प्राणायाम के 8 लाभ | 8 Benefits of Kapalbhati Pranayama
1-यह चयापचय प्रक्रिया को बढ़ाकर वजन(Weight Loss) कम करने में सहायता करता है।
2-यह प्राणायाम(Pranayam) नाड़ियों का शुद्धिकरण करता है।
3-पेट की मासपेशियों को सक्रिय करता है।
4-रक्त परिसंचरण को ठीक कर चेहरे की चमक(Glowing) बढ़ाता है।
5-पाचन क्रिया(Digestive System) को अच्छा कर पोषक तत्वों का शरीर में संचरण करता है।
6-आपकी पेट(Stomach) कि चर्भी फलस्वरूप अपने-आप कम होने लगती है।
7-यह मस्तिष्क और तांत्रिक तंत्र (Nervous System)को ऊर्जान्वित करता है ।
8-यह प्राणायाम मन को शांत(Calm) करता है।
कपालभाति प्राणायाम करते समय सावधानियां (Precautions while performing Kapalabhati Pranayama)
1-यदि आप हर्निया, मिर्गी, स्लिप डिस्क, कमर दर्द, अथवा स्टेंट के मरीज़ हैं तो यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए । 2-यदि कुछ समय पूर्व पेट की सर्जरी (Surgery)हुई है तब भी यह प्राणायाम न करें।
3-महिलाओं को यह प्राणायाम गर्भावस्था (Pregnancy)के दौरान अथवा उसके तुरंत पश्चात नही करना चाहिए। मासिक धर्म(Periods) के दौरान भी यह प्राणायाम नही करना चाहिए।
4-हाइपरटेंशन(Hypertention) के मरीजों को यह प्राणायाम किसी योग प्रशिक्षण के नेतृत्व में ही करना चाहिए।
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