[UTET EXAM] Language Teaching : Method & Merits and Demerits or Aims..

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method of language

Method of Language teaching

भाषा और सीखने संबंधित अनेक विधियां हैं इनमें से बहुत विधियों का विकास दूसरी भाषा को सीखने के संदर्भ में भी हुआ है जो विधियां विकसित हुई है उनमें से कुछ प्रमुख है –

1 पारंपरिक व्याकरण अनुवाद विधि

2 प्रत्यक्ष तरीका

3 ऑडियो लिंगुअल अप्रोच

4  कम्युनिकेटिव अप्रोच

5 कंप्यूटर ऐडेड लैंग्वेज टीचिंग

6 कम्युनिटी लैंग्वेज लर्निंग

7 साइलेंट वे

8 स्टेजोपीडिया और टोटल फिजिकल रिस्पांस

9 द्वितीय भाषा सीखने के लिए निर्धारित मॉनिटर व एलिवेशन मॉडलो से विकसित हुए तरीके|

Merits and Demerits of Language Teaching Method

हमें यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि इनमें से प्रत्येक सिद्धांत व व्यवहार के स्तर पर खास ऐतिहासिक संदर्भ में और जरुरतो को पूरा करने की विकास हुआ है व्याकरण तरीका व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिक और रचनावादी भाषा विज्ञान के तहत औपनिवेशिक ताकतों की जरूरत पूरा करने के क्रम में जन्मा और पनपा है  | कुछ भी हो यह तरीका हमें यह जरूर बताता है कि कैसे एक साहित्यिक भाषा सीखने के लिए केवल विषय वस्तु तथा उनके लिए हुए पाठ पर होना चाहिए|  यदि आज हम इस विधि को अपनाएं तो इसे कहीं सुधारना तो पड़ेगा ही साथ ही हमें सीधे ऑडियो लिंगुअल और कम्युनिकेटिव अप्रोच  के पाठ को ध्यान में रखना पड़ेगा

 Aims of Language Teaching

 1 वक्ता के कथन को समझने की योग्यता:-

एक शिक्षार्थी को जो कुछ कहां गया है उसे समझने के लिए उसमें वक्ता की ओर से आने वाले विभिन्न शाब्दिक संकेतों को ग्रहण करने की ताकत होनी चाहिए इन शब्दों के द्वारा उनको समझ कर सुनकर और समझ कर सम्बन्ध जोड़ने की कुशलता होनी चाहिए|

 2 समझ के साथ पठन की योग्यता होनी चाहिए:-

अपने पिछले ज्ञान के साथ जोड़कर निष्कर्षों द्वारा अर्थ  निर्माण के  योग्य होना चाहिए जो उसे पठन के लिए आत्मविश्वास विकसित करना चाहिए|

 3 सहज अभिव्यक्ति की क्षमता:-

उसे विभिन्न परिस्थितियों में अपने संप्रेषण आत्मक कौशलों को प्रयोग में लाने में समर्थ होना चाहिए उसके खजाने में अभिव्यक्ति के कई तरीके होने चाहिए जिन्हें चुन सकें|

 4 सुसंगत लेखन :-

लेखन एक यांत्रिक कौशल नहीं है इसमें विभिन्न संबंधी युक्तियां अर्थात संबंधी विषयों के द्वारा उस विषय को संयोजित करने एवं पर्यायवाची इत्यादि के प्रयोग द्वारा विचारों को सुसंगत ढंग से संयोजित करने की योग्यता के साथ व्याकरण शब्द ज्ञान विषय विराम चिन्ह आदि पर पर्याप्त नियंत्रण होना चाहिए|  शिक्षार्थी को अपने विचार सहज एवं व्यवस्थित ढंग से प्रकट करने का आत्मविश्वास अपने अंदर  पूर्ण रूप से विकसित करना चाहिए यह केवल तभी संभव है यदि उसका लेखन एक प्रक्रिया के रूप में दिखाई दे|

 5 विभिन्न विषयो की भाषा को समझने की योग्यता का विकास :-

विद्यालय के विषयो के अतिरिक्त विद्यार्थी को विभिन्न कार्यक्रमों जैसे संगीत खेलकूद बागवानी निर्माण का निर्माण कार्य इत्यादि में प्रयोग किए जाने वाली विभिन्न भाषाओं एवं  उनके प्रयोग में भी निपुण होना चाहिए |

6 बालक का वैज्ञानिक अध्ययन:-

भाषा में विभिन्न शिक्षण तकनीक अपनाई जाती है कराए जाने वाले कार्य प्रकार से होने चाहिए कि उसे बच्चा वैज्ञानिक प्रक्रिया के तमाम आंकड़ों का संकलन उनका अवलोकन और उनकी समानता के आधार पर वर्गीकरण एवं परिकल्पना करने में अग्रसर हो| इससे व्याकरण के मानक नियमो को बेहतर ढंग से सीखा जा सकता है

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Posted by- Kamakshi Sharma


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