Yoga : सेतुबंधासन करने की विधि , फायदे और सावधानियां

आज हम आपको योग (yoga) के सेतुबंधासन के बारे में बताएंगे। सेतुबंधासन बहुत ही लाभदायक आसन होता है। संस्कृत में पुल को सेतु कहा जाता है। यह आसन(asana) करने से मन और शरीर के बीच तालमेल बैठता है। इस आसन को करने से शरीर से टेंशन (tension) निकालता है और कम करने में सहायता (help) करता है।

सेतुबंधासन करने की विधि ( Method of Setubandhasana )

  • सर्व प्रथम दरी(carpet) बिछाकर उसमे पीठ के बल लेट जाएं।
  • इसको करने के बाद हाथो (hands)को अपने बगल में रखें।
  • अब धीरे धीरे करके अपने पैरो(legs) को अपने घुटने से मोड़े और अपने हिप्स (hips) के नजदीक लाएं।
  • याद रहे की हिप्स (hips)को जितना हो सके जमीन से ऊपर की तरफ उठें रहे । हाथो (hands) को जमीन पर ही रखें।
  • कुछ देर के लिए साँस(breath) को रोकें।
  • अब सांस छोड़ें और वापस सामान्य स्थिति (normal position) में आ जाएं। अपने पैरो को सीधा करके थोड़ी देर विश्राम (rest) करें।

सेतुबंधासन के फायदे ( Benefits of Sethubandhasana )

  • सेतुबंधासन (Setubandhasana) करने से सीने, गर्दन और रीढ़ की हड्डी में खिंचाव(stretch) पैदा होता है , जिससे शरीर में लचीलापन (flexibility)आता है।
  • सेतुबंधासन करने से पाचन तंत्र में सुधार आता है और साथ ही शरीर का मेटाबॉलिज्म(metabolism) सुधरता है।
  • दिमाग(mind) शांत करने में सेतुबंधासन फायदेमंद होता है।
  • सेतुबंधासन करने से थाइरॉड (thyroid)ठीक होता है।
  • सेतुबंधासन (setubandhasana)करने से रक्त संचार में सुधार आता है।

सेतुबंधासन करते वक़्त सावधानियां ( Caution While doing Setubandhasana )

जिन लोगों को गर्दन और कमर में चोट(wound) लगने या दर्द(pain) की शिकायत है उन्हें सेतुबंधासन (setubandhasana) नहीं करना चाहिए।

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