World First Aid Day (Second saturday in september)#विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस

World First Aid Day (Second saturday in september)#विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस

 

हमारे देश और विश्वभर मे हर वर्ष सितम्बर माह के दूसरे शनिवार को विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस(World First Aid Day) मनाया जाता है। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेडक्रास क्रिसेंट सोसायटीज (International Federation of Red Cross Crescent Societies)ने 2000 में इसकी शुरुआत की। प्राथमिक चिकित्सा को प्रोत्साहन देने के लिए विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस मनाया जाता है। किसी भी रोग के होने या चोट लगने पर किसी भी  व्यक्ति द्वारा चाहे वह अप्रशिक्षित(Untrained) हो जो प्रथम तौर पर सीमित उपचार किया जाता है वह  प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) कहलाता  हैं।

प्राथमिक चिकित्सा (First Aid)का उद्देश्य सीमित साधनों में इतनी व्यवस्था करना होता है कि चोटग्रस्त या अस्वस्थ व्यक्ति (Injured )को अस्पताल तक ले जाने या प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा  इलाज (Operate)कराने की स्थिति में लाने में लगने वाले समय में कम से कम नुकसान हो। अतः साफ़ तौर पर कहा जा सकता है कि प्राथमिक चिकित्सा(First Aid) प्रशिक्षित या अप्रशिक्षित व्यक्तिओं द्वारा सीमित साधनों में किया गया सरल उपचार है। कभी-कभी प्राथमिक चिकित्सा(First Aid) जीवन रक्षक भी सिद्ध होता है।

प्राथमिक चिकित्सा(First Aid) को विभिन्न अवस्थाओं मे दिया जा सकता है  जैसे  – दम घुटना (पानी में डूबने के कारण, फांसी लगने के कारण या साँस नल्ली में किसी बाहरी चीज का अटक जाना), ह्रदय गति रूकना-हार्ट अटैक, खून बहना, शारीर में जहर का असर होना, जल जाना, हीट स्ट्रोक(अत्यधिक गर्मी के कारण शारीर में पानी की कमी), बेहोश या कोमा, मोच, हड्डी टूटना और किसी जानवर के काटने पर।

Purpose of first aid #प्राथमिक चिकित्सा के उदेश्य

प्राथमिक चिकित्सा (First Aid)का मुख्य उद्देश्य पीड़ित व्यक्ति के प्राणो की रक्षा करना है। पीड़ित व्यक्ति को उसकी बिगड़ी हुई अवस्था से बाहर निकालना  है।  घायल व्यक्ति को कम से कम नुक्सान हो और पीड़ित की तबियत के सुधार में बढ़ावा देना है ।

First aid principles #प्राथमिक चिकित्सा के सिद्धांत

 

  • व्यक्ति के सांसो (Breathe)की जाँच करें और जल्द से जल्द व्यक्ति को आराम पहुंचाने की कोशिश करें ।
  • यदि चोट लगी है और रक्तस्राव(Blood) हो रहा हो तो रक्तस्राव को रोकें।
  • यदि घायल(Injured) व्यक्ति को सदमा लगा हो तो उसे समझाएं और सांत्वना दें।
  • यदि व्यक्ति बेहोश हो तो होश में लाने का प्रयास करें।
  • यदि कोई हड्डी(Bone) टूट गयी हो, तो सीधा करें और दर्द को कम करने का प्रयास करें।
  • जितना जल्दी हो सके घायल व्यक्ति को नजदीकी अस्पताल(Hospital) या चिकित्सालय पहुंचाएं।

Fundamentals of First Aid #प्राथमिक उपचार के मूल तत्व

  • रोगी में श्वास, नाड़ी इत्यादि जीवनचिन्ह न मिलने पर उसे तब तक मृत(Dead) न समझें जब तक डाक्टर आकर न कह दे।
  • रोगी को तत्काल चोट के कारण (Resons of injury)से दूर करना चाहिए।
  • जिस स्थान से अत्यधिक रक्तस्त्राव(Bleeding) होता हो उसका पहले उपचार करें।
  • श्वासमार्ग की सभी बाधाएँ दूर करके शुद्ध वायुसंचार(Pure ventilation) की व्यवस्था करें।
  • हर घटना के बाद रोगी का स्तब्धता(Numbness) दूर करने के लिए उसको गर्मी पहुँचाएँ। इसके लिए कंबल, कोट, तथा गरम पानी की बोतल का प्रयोग करें।
  • घायल(Injured) को जिस स्थिति में आराम मिले उसी में रखें।
  • यदि हड्डी (Bone Crack)टूटी हो तो उस स्थान को अधिक न हिलाएँ तथा उसी तरह उसे ठीक करने की कोशिश करें।
  • यदि किसी ने विष (Poison)खाया हो तो उसके प्रतिविष द्वारा विष का नाश करने की व्यवस्था करें।
  • जहाँ तक हो सके, घायल के शरीर पर कसे कपड़े (Tight Clothes)केवल ढीले कर दें, उतारने की कोशिश न करें।
  • जब रोगी कुछ खाने योग्य हो तब उसे चाय, काफी, दूध इत्यादि उत्तेजक पदार्थ (Stimulant)पिलाएँ। होश में लाने के लिए स्मेलिंग साल्ट (smelling salt) सुँघाएँ।
  • प्राथमिक उपचारक (First aider )को डाक्टर के काम में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, बल्कि उसके सहायक के रूप में कार्य करना चाहिए।
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